Sri Ganeshay Namah
श्री गणेशाय नमः
मरीचि के मानस पुत्र ऋषिवर कश्यप एक महान संत थे. उनकी पत्नी अदिति जो मिथिला में शोभती हैं. सभी मूलों में मड़रै मूल का ब्राह्मण सभी ब्राह्मणों में श्रेष्ठ हैं. इस मड़रै मूल के ब्राह्मण मिथिला प्रसिद्द मंगरौनी (मधुबनी), तेयाय, दादपुर, दुलारपुर, ताजपुर, वीरपुर, गोपालपुर (बेगुसराय) एवं बिहार के अन्य जिलों और ग्रामों को सुशोभित कर रहे हैं. मड़रै मूल का ब्राह्मण गंगा के सदृश पवित्र है. अतः स्वाभाविक रूप से इनमें शीतलता का गुण समाहित है. मड़रै मूल के लोग स्वाभाव से ही स्वच्छ होते हैं. वैष्णव अनुरागी, माता पिता और गुरु की सेवा करने वाले इनके बारे में इतिहास साक्षी रहा है. कहा जाता है कि इनका स्पर्श पाकर अपवित्र व्यक्ति भी पवित्र हो जाता है. मड़रै मूल के ब्राहमण की प्रशंसा में समस्तीपुर निवासी श्री उपेन्द्र झा जी मंगरौनी पर प्रसिद्ध पद्य की रचना की. मधुबनी जिला के ब्रह्मपुरा की संजीव कुमारी शास्त्री द्वारा इस श्लोकों को स्वरबद्ध किया गया.
इस ब्लॉग पर हम मर्रे मूल के ब्राह्मण जिनका उद्गम स्थल मधुबनी जिला का मंगरौनी ग्राम रहा है, उनके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे. बिहार के अलग अलग जिलों में रह रहे मर्रे समाज को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.
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